FeaturedJamshedpurJharkhand

जादूगोड़ा में जल प्रदूषण-एक विकट समस्या”

जादूगोड़ा आज हमारे जादूगोड़ा क्षेत्र में विकास के साथ-साथ समस्याओं का भी आवरण हो रहा है। जबकि इसका कारण भी स्वंय मनुष्य ही है। वर्तमान समय में इस समस्या को लेकर केवल भारतवर्ष् ही नहीं बल्कि पूरा विश्व चिंतित है। कुछ स्त्रोत जो मानव द्वारा ही बनाये गये हैं, ऐसे हैं जिनके कारण जल प्रदूषण पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। नदी चूंकि लोगों की धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी है इस कारण और अन्य नदियों का पानी जिस तरह प्रदूषित हुआ है उससे दोगुनी तेजी से जादूगोड़ा की बड़ी नदी, स्वर्णरेखा नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। औद्योगिक कचरे और भी बहुत सारे कारण है। आधुनिकता के चकाचौंध में डूबे लोग गर्मी ज़्यादा बढ़ने पर हज़ारों खर्च कर एसी, कूलर लगा लेते है किंतु कोई भी एक पेड़ नही लगा सकता है। नदियोँ को शुध्द होने की कल्पना सभी करते है किन्तु प्लास्टिक, घर का सारा कचरा नदी में बहाने से भी नही चूकते है। शहरों से सटे इलाकों में बढ़ती हुई आबादी के बाद जादूगोड़ा क्षेत्र में जमीनों का कारोबार तीव्रगति से बढ़ गया है जिसके लिए जमीनों पर उगे पेड़ों को काटकर जमीन के खरीद-फ़रोख़्त धंधा बढ़ गया है। सरकारी संस्थाओं के द्वारा कोई ऐसा मानक तय नही किया गया है कि पेड़ काटने वालों को पेड़ लगाने के लिए भी सख्ती किया जाये। नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हमें प्लास्टिक की थैलियां, बोतल या अन्य सामग्री नदियों में या उनके किनारे नहीं फेंकना चाहिए। नदियों में सिर्फ मिट्टी की ही मूर्तियां विसर्जित करनी चाहिए, लोगों में जागरूकता लाकर ही इसका उपाय किया जा सकता है।

Related Articles

Back to top button