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शहादत पखवाड़ा मना रहा सिख समुदाय मानगो रिफ्यूजी कालोनी सहित कई गुरुद्वारों में चल रहे धार्मिक आयोजन

जमशेदपुर। सिख समुदाय गुरु गोविंद सिंह जी के चार बेटे, मां एवम बाबा जीवन सिंह रंगरेटा के साथ ही सैकड़ों सिखों की शहादत को नमन करते हुए शहादत पखवाड़े मना रहा है।
जमशेदपुर के विभिन्न गुरुद्वारों में सोमवार से विविध धार्मिक आयोजन संचालित किए जा रहे हैं जिससे नई पीढ़ी को सिख पंथ की महान विरासत एवं शहादत से अवगत कराया जा सके।
सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गुरमुख सिंह मुखे के नेतृत्व में गुरु तेग बहादुर मेमोरियल सभागार में पहली बार दो दिवसीय “सफर ए शहादत” कार्यक्रम होगा. मंगलवार को रखे गए श्री अखंड पाठ का भोग गुरुवार को पड़ेगा और गुरुवार एवं शुक्रवार को धार्मिक समागम होगा। जिसमें इंटरनेशनल पंथक ढाडी जत्था प्रो. भूपेंद्र सिंह प्रीत पारसमणी अमृतसर वाले, शहीदी इतिहास पर वीर रस के माध्यम से प्रकाश डालेंगे।इसके अलावा भाई धर्मवीर सिंह अमृतसर वाले, स्थानीय कीर्तनी जत्थे व कथावाचक क्रमश: भाई गुरप्रताप सिंह, भाई रामप्रीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, प्रभजोत सिंह मनी समेत विभिन्न जत्थे गुरवाणी कीर्तन कर संगत को निहाल करेंगे. दोनों दिन संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर वितरित किया जाएगा.

मानगो 27 तारीख तक शहादत दिवस मनेगा
मानगो गुरुद्वारा में 21 दिसंबर से शाम 5:30 बजे से दीवान सजता है और इसमें बच्चों को गुरबाणी कीर्तन इतिहास विरासत से जोड़ने का काम किया जा रहा है। प्रधान भगवान सिंह ने बताया कि कथावाचक गुरु प्रताप सिंह आनंदपुर साहिब, सरसा नदी ते विछोड़ा, चमकौर की गड़ी का युद्ध व सरहिंद में छोटे साहबजादे का दीवार में चुना जाना जैसे ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी दे रहे हैं इसके साथ ही हजूरी रागी हरजिंदर सिंह कीर्तन गायन कर रहे हैं तथा इसमें पूरी कमेटी सहयोग कर रही है।

रिफ्यूजी कॉलोनी गुरुद्वारा में शाम को सजता है दीवान
रिफ्यूजी कॉलोनी गुरुद्वारा में शाम 7:30 बजे के बाद धार्मिक दीवान सजदा है जिसमें पौष के महीने में खालसा पंथ की समाज एवं राष्ट्र को बचाने की घटना के बारे में जानकारी दी जाती है।
सरवंश दानी गुरु गोविंद सिंह के बेटों की शहादत, मां की शहादत, भाई जैता जी एवं अन्य की शहादत के बारे में जानकारी दी जा रही है। 27 तारीख तक धार्मिक आयोजन होता रहेगा।

शनिवार को तार कंपनी गुरुद्वारा में मनेगा छोटे साहबजादे की शहादत दिवस।
तार कंपनी गुरुद्वारा कमेटी के मुख्य सेवादार सरदार अमरजीत सिंह ने बताया कि परंपरा के अनुसार गुरु गोविंद सिंह जी के दोनों छोटे बेटे बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतेह सिंह की शहादत दिवस को श्रद्धा के साथ शनिवार 25 दिसंबर को मनाया जा रहा है। 23 दिसंबर को श्री अखंड पाठ रखा जाएगा और इसका भोग 25 दिसंबर को डाला जाएगा। पंथ के महान कवि, किरतनी जत्थे, रागी सिंह संगत को इतिहास से अवगत कराएंगे। शनिवार के दोपहर में गुरु का लंगर का वितरण होगा।

नामदा बस्ती में रंगरेटा महासभा का आयोजन
नामदा बस्ती गुरुद्वारा में 26 दिसंबर रविवार की दोपहर में रंगरेटा महासभा महिला समिति की ओर से शहादत दिवस का आयोजन किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष बीबी किरनजीत कौर ने बताया कि 24 दिसंबर को पाठ रखा जाएगा जिसका भोग 26 दिसंबर को डाला जाएगा। बाबा जीवन सिंह रंगरेटा गुरु का बेटा भाई जैता जी के बारे में जानकारी दी जाएगी। सिख पंथ में रंगरेटों के योगदान का महत्व बताते हुए नई पीढ़ी को सिखी स्वरुप में रहने को प्रेरित भी किया जाएगा। 26 दिसंबर को दोपहर में गुरु का लंगर भी होगा।

टिनप्लेट गुरद्वारा में रविवार को शहादत दिवस
टिनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के प्रवक्ता एवं छायाकार भाई प्रताप सिंह ने बताया कि 26 दिसंबर रविवार को गुरुद्वारा साहिब में पंत के महान शहीदों को याद किया जाएगा।
सिख इतिहासकार, कीर्तनी जत्थे, रागी सिंह, संगत को आनंदपुर साहिब का युद्ध, चमकौर की गढ़ी का युद्ध, युद्ध के मैदान में बाबा अजीत सिंह एवं बाबा जुझार सिंह की शहादत तथा बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतेह सिंह तथा बाबा जीवन सिंह रंगरेटा की शहादत के बारे में जानकारी दी जाएगी। लंगर का भी आयोजन होगा।

दिसंबर महीने में गुरु तेग बहादुर व अन्य का बलिदान
दिसंबर अगहन-पोष महीने में सिख पंत के गौरवमई त्याग बलिदान का इतिहास है।
दिसंबर महीने में दिल्ली के चांदनी चौक में हिंदू सनातन धर्म की रक्षा हेतु गुरु तेग बहादुर एवं उनके शिष्य भाई सती दास भाई मती दास भाई दयाला जी को मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर शहीद कर दिया गया। वही कालांतर में आनंदपुर साहिब में मुगलों के साथ ही हिंदू पहाड़ी राजाओं की संयुक्त सेना ने हमला किया और झूठी कसम खाकर गुरुजी को किला छोड़ने का आग्रह किया।
आगे चमकौर की गढ़ी मैं संयुक्त सेना से लड़ते हुए गुरु गोविंद सिंह जी के दो बेटे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह शहीद हुए और सरहिंद में गंगू की दगाबाजी के कारण नवाब ने दो छोटे बेटे बाबा जोरावर सिंह बाबा फतेह सिंह को जीवित दीवार में चुनवा कर शहीद कर दिया। गुरु गोविंद सिंह जी की माता बीबी गुजर कौर भी शहीद हो गई। वही रंगरेटा गुरु का बेटा भाई जीवन सिंह अर्थात भाई जैता जी ने युद्ध मैं असाधारण कौशल दिखाया और शहादत का जाम पिया।

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