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सरकार ने विधान सभा में विधायक सरयू राय को आश्वस्त किया कि वह टाटा लीज़ नवीकरण समझौता-2005 की कंडिका-8 की संवैधानिकता पर विचार करेगी

जमशेदपुर। झारखंड विधानसभा ने आज दोपहर बाद जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के निजी संकल्प पर विचार किया. सभा पटल पर रखे एक निजी संकल्प में श्री राय ने कहा कि झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच 2005 में हुए टाटा लीज़ नवीकरण समझौता की की कंडिका -8 असंवैधानिक है. यह कंडिका बिहार भूमि सुधार अधिनियम-1950 की धारा 7डी के प्रावधान के विपरीत है. सभा इसे निरस्त करने का निर्देश सरकार को दे.।
विधान सभा अध्यक्ष के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार इसपर क़ानूनी परामर्श लेगी और तय करेगी कि यह धारा संवैधानिक है या नहीं और तब इसके आधार पर कारवाई करेगी।

सरकार ने पहले दिये गये लिखित उत्तर में कहा था कि कंडिका -8 के अधीन ख़ाली भूमि को सबलीज पर देने से सरकार को पैसा मिलता है. इस निर्णय को कैबिनेट की स्वीकृति मिली हुई है. इसलिये सरकार इसे निरस्त नहीं कर सकती।

श्री सरयू राय ने तर्क दिया कि राजस्व प्राप्त करने के लिये सरकार ग़ैरक़ानूनी एवं ग़ैर संवैधानिक काम नहीं कर सकती. अगर राजस्व प्राप्ति ही प्राथमिकता रहती तो सरकार देवाशीष गुप्ता समिति की सलाह मान ली होती और सबलीज की नीलामी कर दी होती।

उन्होंने कहा कि सरकार पहले यह बतायें कि लीज़ नवीकरण समझौता-2005 की यह कंडिका -8- संवैधानिक है या नहीं ? बिहार भूमि सुधार अधिनियम-1950 के अनुसार कम्पनी ख़ाली ज़मीन का इस्तेमाल सरकार की जांचोपरांत अनुमति से केवल उत्पादन के लिये कर सकती है न कि व्यवसायिक लीज़ देकर धन कमाने के लिये।

श्री राय ने सुझाव दिया कि सरकार राजस्व क़ानूनों की जानकार व्यक्तियों की समिति बनाकर मेरे संकल्प में दिये गये वतथ्य पर सलाह ले ले कि कंडिका – 8 के प्रावधान विधिसम्मत और संविधान सम्मत है या नहीं. है. सरकार इसपर सहमत हुई कि इसे दिखवायेगी, जल्द से जल्द इसपर निर्णय लेगी. सरकार के इस आश्वासन पर श्री राय ने प्रस्ताव वापस लिया।

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