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जो ओआईसी भारत में की गई कुछ विवादित टिप्पणियों के आधार पर अपने आप को आहत बता रहा है, उसने आज तक चीन में उड़गर मुस्लिमों के दामन पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी है : लक्ष्मी सिन्हा


बिहार पटना सिटी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव महिला प्रकोष्ठ श्रीमती लक्ष्मी सिन्हा ने बातचीत में बताया कि पिछले दिनों न्यूज़ चैनल और इंटरनेट मीडिया पर गरमागरम बहस के दौरान सत्ताधारी भाजपा के दो राजनीतिक अधिकारियों ने कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की। उनके अविवेक को पहचान कर भाजपा ने अनुशासनात्मक करवाई की और उन्हें दल से निलंबित निष्कासित किया और यह स्पष्ट किया कि उनके द्वारा व्यक्त विचार पार्टी के नहीं है। सत्ताधारी दल ने यह भी घोषणा की कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती है। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र जहां अल्पसंख्यकों को तमाम ऐसे अधिकार प्राप्त हैं, जो बहुसंख्यक आबादी को भी नहीं मिले हैं और ऐसे अधिकार सविधानप्रदत है, उसके बावजूद इन देशों को भारत में अल्पसंख्यक को का उत्पीड़न होता दिख रहा है। इनके विपरीत चीन में उड़गर मुसलमानों के साथ जिस प्रकार का पशुवत व्यवहार किया जा रहा है, उस पर यह देश न केवल मौन हैं, बल्कि उसके विरुद्ध कुछ हलकों से उठती आवाज के साथ सुर में सुर मिलाने से भी परहेज करते हैं। ऐसे में यह दोहरे रवैया न हुआ तो क्या हुआ? वैसे भी एक राजनीतिक दल के कुछ नेताओं को उस पूरे दल की राय मान लेना या उस देश का अधिकारिक नजरिया समझ लेना भी बचकाना ही कहा जाएगा। तब तो और भी ज्यादा जब ऐसे नेताओं को उस दल ने अपने खेमे से ही बेदखल कर दिया हो। वस्तुत: ये देश अल्पसंख्यकों के अधिकारों की पैरवी करते हुए पाखंडी ही दिखते हैं। यह किसी से छिपा नहीं रहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ क्या सुलूक होता है। अल्पसंख्यक तो छोड़िए वहां गैर_सुन्नी मुसलमानों का कितना बेरहमी से दमन किया जाता है, वह सिहरन पैदा करती है। कई इस्लामिक देश तो ऐसे हैं, जहां किसी अपराध विशेष के लिए गैर_ इस्लामिक लोगों के लिए उससे कहीं ज्यादा कड़ी सजा दी जाती है, जो इस्लाम के अनुयायियों के लिए निर्धारित है। कई देशों में तो गैर_मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है। ऐसे में भारत जैसे समावेशी समाज में मुट्ठी भर लोग कि राय को पूरे देश की आवाज समझना और अनावश्यक दबाव बनाना इन देशों के पाखंडी चेहरों को ही उजागर करता है। श्रीमती लक्ष्मी सिन्हा ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहां करीब 20 करोड़ मुस्लिम चैन से रह रहे हैं, भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा है, इंटरनेट मीडिया का खुलापन है और सुना भी राजनीतिक है। इससे रोजाना राजनीतिक बहस और विवाद उत्पन्न होते रहते हैं। इसमें से कुछ मुस्लिम देश मैं बिजली की गति से पहुंचाए जाते हैं, क्योंकि भारतीय मूल के हैं कुछ कथित ‘उदारवादी’इन देशों में भारत की छवि खराब करने के एजेंडे पर चल रहे हैं। कट्टरवादी विचारधारा की चपेट में फंसे ओआईसी को सुधारना मुश्किल है, पर भारत इस संगठन में शामिल अपने प्रभावशाली मित्रों का साथ लेकर इस सूचना युद्ध में विजई हो सकती है

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