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26 सितंबर से नवरात्र शुरू, इस बार मां दुर्गा का हाथी पर ही होगा आगमन व हाथी पर ही विदाई

आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की जायेगी पूजा

रौशन कुमार जमशेदपुर: नवरात्र इस वर्ष श्रद्धालुओं और भक्तों के लिए बेहद शुभ फलदायक साबित होगा। नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन गजारूढ़ा है। मतलब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। माता रानी का गमन भी विजयादशमी को गजारूढ़ा (गज) पर हो रहा है। ज्योतिषाचार्य श्यामलाल पंडित ने कहा कि मां का हाथी पर आना और इसी पर विदा होना शुभ है। शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना 26 सितम्बर को हो रहा है, जबकि विजयादशमी 5 अक्टूबर (बुधवार) को है।

मां दुर्गा का कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त
पंडित जी के अनुसार मां दुर्गा की कलश स्थापन का समय के लिए शास्त्रों में तिथि व नक्षत्रों को मान्यता दी गई है। इस वर्ष के नवरात्रि में पूरे दिन शुभ मुहुर्त में कलश स्थापन किया जाएगा। केवल सुबह 7.30 से 9 बजे तक राहुकाल में कलश स्थापन नहीं होगा। पूजा पंडालों में व घरों में कलश स्थापन प्रतिपदा तिथि में होता है। इसमे मां शारदे का आवाहन सप्तमी तिथि व मूल नक्षत्र में होता है।

शनिवार 1 अक्टूबर को देवी बोधन, आमंत्रण अधिवासन होगा। पंडित जी कहते हैं कि मूल नक्षत्र युक्त सप्तमी तिथि में ही माता रानी का पट दर्शन के लिए खुलता है। इस दिन मूल नक्षत्र रात 2:21 तक है लेकिन सप्तमी तिथि सायं 06:22 तक ही है। इस वर्ष माता रानी का पट 2 अक्टूबर रविवार को शाम 06:22 से पहले होगा। सप्तमी तिथि में ही पत्रिका प्रवेशन होगा।
महानिशा पूजा 2 अक्टूबर को होगी क्योंकि सप्तमी की समाप्ति शाम 06:22 में है। 3 अक्टूबर को अष्टमी शाम में 4:24 बजे तक है। इस तिथि में महागौरी दर्शन पूजन, पूजा पंडाल में संधि पूजा दिन 04:24 तक होगा। श्रद्धालुओं को दुर्गासप्तशती का पाठ अनुष्ठान 26 सितंबर से शुरू होकर महानवमी 4 अक्टूबर तक होकर माता सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना के बाद होमादि दिन 1:32 तक करना होगा। विजयादशमी 5 अक्टूबर को है, जिससे नवरात्राव्रती पारण करेंगे।

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