FeaturedJamshedpurJharkhand

पाप के विरुद्ध संग्राम के संकल्प के साथ मनाया गया नीलकंठ दिवस

आनंद मार्ग ध्यान मंदिर आनंदपुरी हज़ारीबाग में आयोजित त्रिदिवसीय सेमिनार का नीलकंठ दिवस के कार्यक्रम के साथ हुआ समापन

पांच साल से भी ज्यादा उपवास में रहे थे श्री श्री आनंदमूर्ति

दवा के नाम पर विष दिया गया

आनंदपुरी कॉलोनी में रविवार 12 फ़रवरी को आनंद मार्ग प्रचारक संघ, हज़ारीबाग भुक्ति के द्वारा नीलकंठ दिवस मनाया गया। तीन घंटे का अष्टाक्षरी महामंत्र “बाबा नाम केवलम” का संकीर्तन किया गया और उसके बाद सेमिनार के विषय पे प्रशिक्षण के साथ नारायण सेवा की गयी।

हजारीबाग भुक्ति प्रधान जनरल राजेंद्र राणा ने बताया कि यह दिवस आनंद मार्ग के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी को तत्कालीन सरकार ने बाकीपुर सेंट्रल जेल, पटना में किसी साजिश के तहत जहर दिया था, जिसे उन्होंने नीलकंठ की तरह अपने शरीर में जज्ब कर लिया था। श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने प्रशासन के खिलाफ जांच की मांग की, पर प्रशासन ने उनकी मांग को अनदेखा कर दिया और इसके बाद उन्होंने 1 अप्रेल 1973 से 2 अगस्त 1978 तक उपवास रखा। जो कि संसार में एक अलग मिसाल है। उन्होंने इस दिन की बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर नीलकंठ दिवस के रूप में मनाने का संदेश दिया तथा यह बताए विष का जबाब अमृत से दोगे।

न ही सरकार ने विष प्रयोग की जांच करवायी और नहीं बाबा ने अपना उपवास तोडा ।
5 वर्ष 4 महीने 2 दिन तक उपवास जारी रहा। हत्या मामले से बरी हो बाबा 2 अगस्त 1978 को ससम्मान जेल से रिहा हो गए। 12 फ़रवरी को आनंदमार्गी पुरे विश्व् में नीलकंठ दिवस के रूप में मनाते हैं।

*सेमिनार के तीसरे दिन केंद्रीय प्रशिक्षक आचार्य व्रजगोपालानंद अवधूत जी के द्वारा सेमिनार के विषय शिव की शिक्षा पर प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया की आनंद मार्ग के प्रवर्त्तक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने नमः शिवाय शांताय नामक पुस्तक में शिव द्वारा बताई गई शिक्षा के बारे में वर्णन किया है जिसमें शिव की शिक्षा – 1 अध्याय में उन्होंने भगवान सदाशिव द्वारा प्रदत्त 12 शिवोक्तियों के ऊपर प्रकाश डाला है।*

प्रथम शिवोक्ती ‘वर्त्तमानेषु वर्त्तेत’ के ऊपर प्रकाश डालते हुए आचार्य जी ने बताया कि सदाशिव का कहना था कि तुम वर्तमान की भित्ति पर खड़े होओ, अतीत को अपने वर्तमान की संवृद्धि में लगाओ और भविष्य की परिकल्पना इस तरह से करो जिससे मानविक ऐश्वर्य ठोस रूप ग्रहण कर ले। 12वां शिवोक्ति है ‘आत्ममोक्षार्थम जगत हिताय च’ जो कि आनंद मार्ग का उद्देश्य भी है, जिसका भाव है स्वयं की मुक्ति या मोक्ष एवं जगत की सेवा। यही मनुष्य के लिए धर्माचरण है। ऐसे ही 12 शिवोक्तियोंं पर आचार्य जी ने बड़े ही रोचक ढंग से चर्चा की।
सबने मंत्रमुग्ध होकर विषयों को गहन रूप से श्रवण किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में हज़ारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा , चतरा इत्यादि भुक्ति के सभी मार्गियों का सराहनीय योगदान रहा।

Related Articles

Back to top button