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फोर्टिफाइड चावल को लेकर फैली भ्रांतियों/मिथकों तथा तथ्यों को उजागर करने के लिए एक दिवसीय बहु-हितधारक जागरूकता कार्यशाला आयोजित


जमशेदपुर: समाहरणालय सभागार, जमशेदपुर में जिला प्रशासन पूर्वी सिंहभूम द्वारा खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, झारखण्ड सरकार के तत्वाधान में राईस फोर्टिफिकेशन विषय पर बहुहितधारक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल को लेकर फैले मिथकों को दूर करने तथा तथ्यों को बताने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपायुक्त विजया जाधव द्वारा की गई। जिला उपायुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि “राईस फोर्टिफिकेषन” से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों और इसके एनिमिया रोकथाम में फायदे को जन-जन तक पहुंचाना अनिवार्य है। राशन दुकानों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, विद्यालयों, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से फोर्टिफाईड राईस से संबंधित जानकारियों को प्रदर्शित करना जरुरी है ।
कार्यक्रम की शुरुआत में विभागीय उप सचिव एल०पी० शर्मा ने इस योजना पर प्रकाश डाला और बताया कि राष्ट्रीय खाद्य, सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत जन वितरण प्रणाली दुकान, ICDS, और PM – पोषन के तहत दिए जा रहे फोर्टिफाईड राईस का समुदाय पर हो रहे साकारात्मक प्रभाव का अध्ययन निति आयोग द्वारा आने वाले समय में पूर्वी सिंहभूम में किया जाएगा।
इस कार्यशाला में एम्स दिल्ली, एफएसएसएआई, रिम्स रांची, राज्य नोडल अधिकारी- फूड फोर्टिफिकेशन, एनएफएसए के विशेषज्ञ शामिल हुए। एनएफएचएस(NFHS) के मुताबिक झारखंड में 06-59 महीने की आयु के 67.5% बच्चे एनीमिक हैं जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। 15-49 वर्ष की 56.8% गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं, 15-19 वर्ष की आयु के 65.8% किशोर एनीमिक हैं और 15-49 वर्ष के 29.6% पुरुष एनीमिक हैं जो अपने आप में गंभीरता को दर्शाते हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग ने वर्ष 2021 में पूर्वी सिंहभूम जिला के दो प्रखंड धालभूमगढ़ और चाकुलिया में एक पायलट योजना शुरू की थी और पायलट योजना की सफलता के बाद इसे राज्य के 24 जिलों में बढ़ाया जाएगा, झारखंड सरकार ने हाल ही में इस पर कैबिनेट की मंजूरी दी है। झारखंड राज्य 24 जिलों में पीडीएस के माध्यम से फोर्टिफाइड चावल वितरित करने के लिए कार्यक्रम शुरू करने के लिए तैयार है। हालांकि, कुछ खाद्य अधिकार कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया प्रभावित व्यक्ति पर फोर्टिफाइड चावल की खपत को लेकर चिंता जाहिर की गईहै। इस कार्यशाला के माध्यम से इस तरह के प्रश्नों को बहुत अच्छी तरह से संबोधित किया गया और फोर्टीफाइड चावल पर कई मिथकों और गलत धारणाओं को दूर करने को लेकर प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा फोर्टीफाइड चावल क्यों जरूरी है तथा इसके क्या फायदे हैं जैसे विटामिन ए, आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर फोर्टिफाइड चावल के सेवन के लाभों पर विशेष तौर पर प्रकाश डाला गया । एम.एस यूनिवर्सिटी, बडौदा की डॉ सिरिमाओ नायर ने कहा कि फोर्टिफाइड चावल का सेवन एक लाभकारी कार्यक्रम है, इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। जनसंख्या और हमारे द्वारा खाए जाने वाले आहारों पर व्यापक दृष्टिकोण को देखते हुए मानकों के स्तर को ध्यान में रखा जाता है। भारत में हमारे पास पहले से ही 6-7 अध्ययन हैं, जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। वैज्ञानिक पैनल ने भारत के लिए मानकों को अंतिम रूप देने से पहले 8-10 से अधिक बैठकों के लिए कई स्तरों पर विचार-विमर्श किया।
रिम्स के एक अन्य विशेषज्ञ डॉ. देवेश कुमार ने कहा कि आदिवासी आबादी, विशेष रूप से पीवीटीजी के लिए, फोर्टिफाइड चावल महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी थाली में वास्तव में पोषण की कमी होती है। यह झारखंड में प्रचलित हीमोग्लोबिनोपैथी को ध्यान में रखते हुए किया गया है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. कपिल यादव ने कहा कि “फूड फोर्टिफिकेशन भारत और झारखंड राज्य में एनीमिया के नियंत्रण के लिए प्रमुख रणनीतियों में से एक है। झारखंड सरकार के समर्थन से भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पोषण के मामले में हाशिए पर रहने वाले बड़े आबादी के लिए फोर्टिफाइड चावल प्रदान करने की योजना है जो खासकर झारखंड राज्य की महिलाएं और बच्चे के लिए काफी फायदेमंद होगा।
इस अवसर पर माननीय विधायकगण के प्रतिनिधि, जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू, उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा, प्रखंड प्रमुख, एमडी जेएसएफसीएल यतींद्र प्रसाद, अतिरिक्त सचिव सतीश चौधरी, प्रभात कुमार, डीएफपीडी, झारखंड सरकार, दिलीप तिर्की, डॉ सुधीर मकनीकर, निदेशक पीएटीएच, डॉ साहिर पाल सिविल सर्जन पूर्वी सिंहभूम, राजीव रंजन जिला आपूर्ति पदाधिकारी, रोहित कुमार जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, रोहिणी सरन, अभिषेक कुमार, सभी एमओआईसी, सीडीपीओ, राईस मिलर तथा अन्य उपस्थित थे ।

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