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टेल्को वर्कस यूनियन के अफसर जावेद के समर्थन में आए आकाश दुबे और हर्षवर्धन

जमशेदपुर। टेल्को वर्कर्स यूनियन ने अफसर जावेद द्वारा टाटा मोटर्स जमशेदपुर के अस्थाई कर्मियों को स्थाई करने के लिए जो मुंबई हाई कोर्ट के फैसले को लागू करने की मांग औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत डीएलसी से किया था उसका लिखित पत्र देकर समर्थन किया है।
यदि कोई यूनियन किसी कर्मचारी द्वारा उठाए किसी विवाद का समर्थन लिखित में करती है तो वह औद्योगिक विवाद में परिवर्तित हो जाता है और उसका समाधान उक्त अधिनियम के तहत होता है।
15/06/को झारखंड हाई कोर्ट ने आदेश पारित कर अफसर जावेद को डीएलसी के समक्ष फ्रेश प्रतिवेदन देकर अपनी बात रखने को कहा था और कंपनी को इस पर जवाब दाखिल करने के उपरांत डीएलसी को न्याय संगत फैसला लेने को कहा था।.इसके बाद अफसर जावेद ने 27/06/को इस संबंध में डीएलसी को पत्र लिखा इसके बाद डीएलसी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 30/09/को कंपनी को आदेशित किया कि अगले 3 महीना में स्थाईकरण का एक्शन प्लान बताएं।
डीएलसी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि मुंबई हाई कोर्ट के फैसला इस मामले में नहीं लागू होंगे जबकि झारखंड हाई कोर्ट ने ऐसा नहीं कहा है।.हाई कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा है कि फैसला लागू करने का आदेश सीधे रेट कोर्ट के द्वारा नहीं दिया जा सकता क्योंकि टाटा मोटर्स स्टेट नहीं है।
फैसला सीधे लागू नहीं हो सकता इसलिए ही डीएलसी को औद्योगिक विवाद अधिनियम के अंतर्गत निर्णय लेने को कहा गया है ।
टेल्को वर्कर्स यूनियन के समर्थन करने से यह अब वेैद औद्योगिक विवाद बन गया है।.अब मुंबई हाई कोर्ट के फैसले को कानूनी रूप से लागू करवाया जा सकता है ।
टेल्को वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष आकाश दुबे और हर्षवर्धन का कहना है कि टाटा मोटर्स वर्कर यूनियन एक तरफ 100 आदमी को रिलीज कराकर सुविधा ले रही है और दूसरी तरफ आंदोलन करने का खड्यंत्र रच रही है या मजदूरों के साथ पूरा पूरी धोखा है। यदि मजदूर हित के लिए प्रबंधन से लड़ना है तो पहले 100 आदमी का रिलीज छोड़कर शॉप फ्लोर में काम करें और फिर मजदूर के हित में प्रबंधन से लड़ाई लड़े।

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