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6 वें दिन डुबाडीह, राजनगर, बुरकुली, बुरुडीह, गम्हरिया, आदित्यपुर होते सहिया पदयात्रा बिरसा चौक साकची पहुँच कर सबसे पहले सभी पदयात्रियों ने वीर शाहिद बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी

जमशेदपुर। दिनांक 15 नवंबर 2021 साकची पहुंचने पर विष्णु सिंह मुंडा, जय नारायण मुंडा, गीता सुंडी, दिनकर कच्छप और राजू बेसरा के नेतृत्व में लोगों ने पदयात्रियों का स्वागत किया. इस पदयात्रा का मुख्य केंद्र 11 वर्षीय नन्ही बच्ची पारी मुर्मू थी. विष्णु सिंह मुंडा ने कहा पारी सच की हमारे समाज की परी और प्रेरणाश्रोत है. उसके जज़्बे को सलाम जो 6 दिनों तक बारिश में भी इस पदयात्रा में चलती रहीं.
इस पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे जीतराई हँसदा ने कहा कि समाज सेवा के लिए संसाधनों एवं आर्थिक तंगी कभी अर्चन नहीं बनती है. समाज का आशीर्वाद, स्नेह और समर्थन के कारण ही काफी दिक्कतों का सामना करते हुए ये पदयात्रा को सफल हुआ है.
ये पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य आपसी भाईचारगी को बढ़ाना, सुख शांति बहाल करने और झारखंड एवं आदिवासियों की संस्कृति, भाषा, आस्था, और यहां की प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है.
जीतराई हँसदा ने कहा कि हमारे इस पदयात्रा में अनेक महिलाओं के साथ साथ एक 11 वर्षीय बच्ची पारी मुर्मू भी शामिल है. ये इस बात का प्रमाण है कि हमारे आदिवासी समाज में लड़कियों एवं महिलाओं को बराबरी का दर्जा और महत्व दिया जाता है और मैं गर्वान्वित महसूस करता हूँ कि पुरुष प्रधान समाज में स्त्रीलिंग शब्द का चयन किया गया और इस पदयात्रा का नाम “सहिया” दिया है.
आज वोट बैंक के ख़ातिर समाज और खंडित खंडित किया जा रहा है और आज पूरे विश्व में कट्टरता बढ़ रही है. जो भारत लोकतांत्रिक व्यवस्था और धर्मनिरपेक्षता के लिए जाना जाता है आज इस देश को कट्टरता के लिए जाना जाता है जो कि देश और समाज दोनो के लिए हानिकारक है.
समाज में खुशहाली और देश को विकसित होने के लिए शांति और आपसी भाईचारा बहुत ही महत्वपूर्ण है. कट्टरता मनुष्यों के अंदर नकारात्मक सोच एवं हिंसा पैदा करती है जिससे वो मनुष्यता की राह से भटक कर हैवानियत की ओर अग्रसित हो जाता है जिसका क्षति समाज और देश को पहुंचती है. मानव एक सामाजिक प्राणी है इसलिए मानवता सबसे पहला धर्म होना चाहिए.
हम आदिवासी समाज अमन पसंद और प्रकृति के पुजारी हैं हमारा मन हवा और पानी की तरह शुद्ध और सबको सहन करने की क्षमता है.
आज बिरसा जयंती के अवसर पर हम प्रण लेते है की हम यहां की साहित्य, भाषा, संस्कृति एवं प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की हर सम्भव प्रयास करेंगे बहुत ताकि झारखंड को समृद्ध, शिक्षित और विकसित राज्य बनाया जा सकें.
इस पदयात्रा में शामिल नन्ही सी बच्ची पारी मुर्मू ने कहा कि हमें पढ़ना चाहिए और जागरूक होना चाहिए. इस पदयात्रा में शामिल हो के मुझे अच्छा लगा और अपने संस्कृति और इतिहास को जानने का मौका मिला और साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के गांव के लोगों से मिलने का मौका मिला.
इस पद यात्रा का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सबन बरला ने कहा कि हम सभी पदयात्रियों, आज इस मौके पर उपस्थित और इस अभियान को समर्थन करने वाले सभी लोगों के आभारी हूँ और साथ ही अपील करता हूँ कि समृद्धि और भाईचारगी को बढ़ाने वाले इस अभियान में शामिल हो.
इस पद यात्रा में सबन बारला, बृद्धन मुर्मू, डोमेन मुर्मू, सोमाय मार्डी, राजू बेसरा, गीता सुंडी, दिनकर कच्छप, अम्बिका यादव, शारदा देवी, पारी मुर्मू, हरेन्द्रनाथ हँसदा, उमा मुर्मू, जय नारायण मुंडा, बसंती मुर्मू डुमनी मुर्मू, रश्मि मुर्मू, सुखी मुर्मू, गणेश मुर्मू, रैमत मुर्मू, सुमि किस्कु, माया देवी, मैना मुर्मू, सुसनी मुर्मू, सीता मांझी, लकी मुर्मू, बसंती मुर्मू, धनी मुर्मू, पिंकी सोरेन, बिसु सिंह मुंडा, गोपाल मुर्मू, सनादा बास्के आदि लोग भाग लिया.

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