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धर्म और मर्यादा के पालन हेतु आज की युवा पीढी को संस्कार की सीख जरूरी- पंडित विवेक महाराज

भुइयाडीह नीतिबाग कॉलोनी में श्रीमद् भागवत कथा का चौथा दिन

जमशेदपुर। भुइयाडीह स्लैग रोड़ स्थित नीतिबाग कॉलोनी में चल रहे सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन मंगलवार को कथावाचक आचार्य बालव्यास पंडित विवेक महाराज ने भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण के जन्म का मनोरम वर्णन किया गया। कथा के दौरान मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु नंद के घर आनंद भया जय कन्हैया लाल की भजनों के साथ झूम उठे। भागवत कथा में कृष्ण जन्म की बधाई सुन श्रोता नाचने लगे और वातावरण कृष्णमय हो गया। श्री हरि गोबिन्द सेवा समिति और जेके पांडा इकोसिटी, गालुडीह द्धारा आयोजित कथा के दौरान राम जन्म, राम चरित्र और कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि जब जब धरती पर अनाचार और अन्याय बढ़ता है, तब तब प्रभु पृथ्वी और सर्वजन हिताय विविध रुप में अवतार लेकर अत्याचारियों का नाश करते हैं। आचार्य ने कहा कि आज की युवा पीढी धन कमाने में लगी हुई है लेकिन अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम कर रहे हैं। उन्होंने आज की युवा पीढी को भगवान श्री कृष्ण से संस्कार की सीख लेने की बात कही। जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं उसके बाद भी वह अपने माता पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। महाराज ने कृष्ण जन्म की कथा के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने आदर्श स्थापित किया है, वह आज भी प्रासंगिक है। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, वनवास, रावण वध सहित राम राज्याभिषेक पर सुन्दर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई। कथा वाचक ने कहा कि जीवन में जब भी भगवत नाम सुनने का अवसर प्राप्त हो, उससे विमुख नहीं होना चाहिए। भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि जब जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब तब परमात्मा अवतार धारण करके धरती पर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए। यदि अपना उद्धार करना चाहते हो तो परोपकार में अपना जीवन लगाओ, जिससे तुम्हारा कल्याण होगा। कथा वाचक ने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे, लेकिन एक न एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। भागवत कथा में वामन अवतार कथा सहित कई प्रसंग का वर्णन किया गया। पांचवें दिन बुधवार को भगवान की बाल लीला, गिरिराज पूजा, छप्पन भोग, माखन चोरी कथा का प्रसंग सुनायेंगे। इस अवसर पर प्रमुख रूप से गोविन्द राम सरोज, श्रीराम सरोज, हरिओम सरोज, नंद जी सिंह, दिलीप सिंह, रवि सिंह सहित काफी संख्या में श्रद्धालु गण उपस्थित थे।
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