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महिला पौरोहित्य ने वैदिक मंत्र “ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरंतु सिंधव:”मंत्र के साथ संपन्न कराया विवाह

आनंद मार्ग के संस्थापक आनंदमूर्ति ने महिलाओं को पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया समाज में सभी को समान अधिकार है इससे किसी को वंचित करना घोर पाप है

जमशेदपुर। 27 दिसंबर 2021 आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से स्थानीय गुजराती सनातन समाज में जमशेदपुर के (स्वर्गीय प्रेमलता एवं स्वर्गीय शंभू जी )की एकलौती सुपुत्री चांदनी का विवाह प्रशांत मोहन (सुपुत्र श्री मोहनलाल एवं श्रीमती सूर्यकांता अकोला, महाराष्ट्र)
आनंद मार्ग पद्धति से विवाह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ, वर पक्ष से पौरोहित्य का काम आचार्य स्वरूपानंद अवधूत एवं वधू पक्ष से महिला पौरोहित्य का काम अवधूतिका आनंददेवश्री आचार्या ने किया

महिला पौरोहित्य अवधूतिका आनंददेवश्री आचार्या ने कहा कि
क्रांतिकारी (बिना तिलक दहेज का एवं जातिविहीन संप्रदाय विहीन विवाह) को आनंद मार्ग में प्राथमिकता दी जाती है इस विवाह में वर एवं वधु दोनों के परिवार की सहमति अति आवश्यक है दोनों परिवार वर वधु समान विचारधारा के हो तभी विवाह को सफल बनाया जाता है आनन्द मार्ग प्रचारक संघ की अवधूतिका आनंददेवश्री आचार्या का कहना है कि महिला तो भौतिक स्तर पर स्वालंबी हो रही है परंतु उन्हें मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर भी विकसित होने का अवसर प्रदान करना होगा हम महिलाओं को केवल पौरोहित्य गिरी का अधिकार ही नहीं बल्कि महिलाओं द्वारा वैवाहिक कार्यक्रम दाह संस्कार कर्म ,श्राद्ध कर्म करने का भी अधिकार समाज को देना होगा आज तक समाज में पुरुष पौरोहित्य के द्वारा ही सारे धार्मिक कर्मकांड संस्कार कार्यक्रम संपन्न होता था आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने महिलाओं को पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया समाज में सभी को समान अधिकार है इससे किसी को वंचित करना घोर पाप है महिला एवं पुरुष समाज रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं इनके समान अधिकार के बिना समाज का सर्वांगीण उत्थान संभव नहीं है महिला एवं पुरुष को आनंदमार्ग में समान अधिकार दिया गया है महिलाओं को भी मानसिक शारीरिक एवं आध्यात्मिक उत्थान का अधिकार मिलना चाहिए अंधविश्वास से भी महिलाओं को ऊपर उठाना होगा शादी विवाह के लिए सभी समय सुबह जब सभी भगवान के ही बनाए हुए हैं तो सब कुछ समान है हर समय शुभ है इसका भेदभाव समाज में खत्म करना होगा तभी समाज का सर्वांगीण विकास संभव होगा आचार्या ने कहा कि नारी और पुरुष दोनों एक ही परम पिता के संतान है क्योंकि दोनों परम पिता के संतान हैं इसलिए जीवन की अभिव्यक्ति और अधिकार के क्षेत्र में दोनों को समान अधिकार है महिलाओं को भी आनंद मार्ग में विवाह दाह संस्कार एवं श्राद्ध कराने का अधिकार दिया गया है आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने महिलाओं को पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया है समाज में सभी को समान अधिकार है इससे किसी को भी वंचित करना घोर पाप है महिला एवं पुरुष समाज रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं इनके समान अधिकार के बिना समाज का सामाजिक उत्थान संभव नहीं है आनंद मार्ग प्रचारक संग का कहना है कि महिलाओं को हर स्तर पर महिला सशक्तिकरण की बात अब केवल दिखावा ही रह गया है महिलाओं को हर स्तर पर अधिकार देना होगा तभी महिलाओं का सर्वांगीण विकास संभव है

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