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ठेकेदारी प्रथा के तहत कार्य करने वाले साफ-सफाई एवं सेनिटेशन मजदूरों को परमानेंट करना होगा : रमेश मुखी

जमशेदपुर। देश के अंदर साफ-सफाई एवं सेनिटेशन के कार्यों में लाखों की संख्या में मजदूर कार्यरत हैं जैसे कि रेलवे, कल-कारखाने, खदान, अस्पताल,शिक्षण संस्थान, नगर शहर, इत्यादि जगाहों में कार्यरत हैं। इनमें जो कार्यरत मजदूर है इनके लिए वर्तमान समय में कोई भी कानून काम नहीं करता है, जिसके चलते इन्हे न्यूनतम मज़दूरी तथा अन्य आर्थिक लाभ से वंचित रहना पड़ता है, जबकि यह कार्य ठेका प्रतिष्ठानों से करवाना गैर कानूनी है लेकिन उसके बाद भी ठेके के माध्यम से लाखों की संख्या में मजदूरों से कार्य करवाया जा रहा है। यह मजदूर आर्थिक सामाजिक एवं ज्ञान से भी कमजोर है। इनमें अधिकांश दलित आदिवासी एवं इसी तरह के कमजोर जाति के लोग कामों में लगे हुए हैं। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के श्रम विभाग द्वारा ठेकेदारों को एवं प्रतिष्ठानों को कार्य करने के लिए गैर कानूनी तरीके से हाउसकीपिंग एवं मिसलेनियस जोब के नाम से ठेका चलाने का लाइसेंस दिया जाता है, जबकि यह सम्पूर्ण रूप से गैर कानूनी कार्य है। सन् 1990 से पहले जितने भी साफ-सफाई एवं सेनिटेशन कार्यों को करने वाले मजदूर परमानेंट हुआ करते थे। सन् 1991 मे भारत में जब न‌ई आर्थिक नीतियों को लागू गया उसके बाद धिरे धिरे ठेका के माध्यम से इन कार्यों को चलाना शुरू किया गया। पिछले 10 वर्षों में तेजी से ठेकेदारी के माध्यम से परमानेंट मजदूरों को हटाकर ठेके के माध्यम से कार्य लिया जा रहा है जबकि हमारे वर्तमान सरकार कहते हैं कि हम दलित आदिवासियों एवं इसी तरह के लोगों की सरकार है इसका भला करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री ने कुम्भ मेले में साफ-सफाई कार्य करने वाले मजदूरों का पैर धोकर सम्मानित किया, लेकिन उनके जीवन स्थिति पर आज तक कुछ सोचा ही नहीं है। इन मजदूरों को समाज में घृणा नफरत अछूत जैसे मानव समाज में झेलना पड़ता है। इस संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से हम यह मांग करते हैं कि इन कार्यों को ठेका से करवाने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध संघीय अपराध घोषित करते हुए कारवाई की जाये, जहां कहीं भी कार्यरत साफ-सफाई एवं सेनिटेशन मजदूरों को परमानेंट किया जाए। साथ ही साथ फरवरी 2024 में एक ज्ञापन राष्ट्रपति महोदया को उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम के माध्यम से देने का निश्चय किया गया है। इस संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से यूनियन के सचिव रमेश मुखी, रामदास करूवा, भारत बहादुर, सीमा मुखी, मरियम टोपनो, सोमवारी हेमबरम, जामबी सोय, कार्तिक, रजनी, सुमित्रा बिरूली, सोमवारी सोय, इत्यादि मजदूर उपस्थित थे।

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