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जय श्री राम’के उपचार के पहले उनके आदर्शो और विचारों का भी अनुसरण करना होगा

पटना। श्री राम मर्यादा के शिकार है। वह सबके हैं और
उनका मंदिर सबका है। श्री राम जी मर्यादा के
नियामक, प्रेरक और शिकार हैं, वह मर्यादा तो
सभी धर्मों का मूल्य और आदर्श है।
यह हमारे देश के लिए बहुत ही गौरव
की बात है कि सारी दुनिया भगवान श्री राम के
रंग में रंग गई है। श्री राम एक अच्छे पुत्र, राजा,
पति, मित्र थे। श्री राम सनातन धर्म के लिए ही
नहीं,बल्कि हर धर्म के लिए आदर्श। श्री राम की
कथाओं में हमें इंसानियत, नैतिकता और
राजा-प्रजा के प्यार भरे संबंधों का संदेश
मिलता है। आज जिस तरह दुनिया में वैर-
विरोध, नफरत, अशांति फैल रही है, राजा
अर्थात लगभग सत्ताधारी पथभ्रष्ट हो अपनी
प्रजा अर्थात आमजान की समस्याओं को
दरकिनार कर अपना स्वार्थ पूरा कर रहे हैं,
उनके लिए तो और भी जरूरी हो गया है कि
रामकथा की अद्भुत शक्तियों का बखान किया
जाए, रामकथा को पढ़ा और पढ़ाया जाए।
श्रीराम के जीवन से सबक भी लिया जाए तो
संसार में हर तरफ शांति, भाईचारा और
मर्यादा का बोलबाला हो जाए अगर श्रीराम
की सही मायने में आराधना करनी है और
रामराज स्थापित करनी है तो, ‘जय श्री राम’
के उपचार के पहले उनके आदर्श और विचारों
को भी अनुसरण करनी होगी।

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