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रांची के एतिहासिक रातू किला में 170 सालों से हो रही है मां दुर्गा की पूजा, जानें दिलचस्प जानकारी

सेन्हा भाटाचार्य
रांची;रांची के रातू किले में मूर्ति पूजा करीब 170 वर्षों से हो रही है, इससे पूर्व कलश स्थापित कर पूजा की जाती थी. उस परंपरा को महाराजा चिंतामणि शरण नाथ शाहदेव व युवराज गोपाल शरण नाथ शाहदेव ने कायम रखा जिसे अब उनके परिवार के लोग आगे बढ़ा रहे हैं.

रांची. महालया के साथ ही झारखंड की राजधानी रांची एवं आसपास के क्षेत्रों में शारदीय नवरात्र के मद्देनजर भक्ति का माहौल है वहीं कोविड-19 के कारण सरकारी दिशा-निर्देश के साथ दुर्गा पूजन उत्सव की तैयारी की जा रही है. ऐतिहासिक रांची के रातू किला में प्रतिमा निर्माण को अंतिम रूप दिया जा रहा है. षष्ठी तिथि सोमवार 11 अक्टूबर को शाम सात बजे से वेलवरण पूजन के साथ रातू किला में दुर्गा पूजा आरंभ हो जाएगा. सप्तमी मंगलवार 12 अक्टूबर को नव पत्रिका पूजन के उपरांत सुबह दस बजे रातू किला का मुख्य द्वार आम लोगो के लिए खोल दिया जाएगा.कोविड-19 के सरकारी दिशानिर्देश का पालन करते हुए भक्तजन माता दुर्गा का दर्शन कर किला का अवलोकन कर सकेंगे. संधि पूजन अष्टमी बुधवार 13 अक्टुबर को रात्री 11.41 बजे तथा नवमी गुरुवार 14 अक्टुबर को दोपहर एक बजे विशेष पूजा का शाक्त बलि प्रदान की जाएगी तथा दशमी शुक्रवार 15 अक्टुबर को सायं पांच बजे महाराजा तालाब में प्रतिमा का विसर्जन कर किला का मुख्य द्वार आम जनों के लिए बंद कर दिया जाएगा.रांची के रातू किला मे बांग्ला मतानुसार से दुर्गा पूजा होता चला आ रहा है. यहां रांची समेत बिहार, बंगाल, उड़ीसा व अन्य राज्य के लोग पहुंचते हैं. रातू किला के विशाल मुख्य द्वार के पास पुराने जमाने का तोप लोगों को पुराने जमाने की याद दिलाती है. अंदर आते ही विशाल किला व दुर्गा माता का मंदिर सामने दर्शन पड़ता है. माता का दर्शन कर आकर्षक किला, सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी, वृहद गार्डन समेत अन्य प्रजाति के पक्षी का अवलोकन श्रद्धालुगण करते हैं.

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